छत्तीसगढ़

बिलासपुर हाईकोर्ट ने सरकारी विभागों की सुस्त कार्यप्रणाली पर जताई कड़ी नाराजगी

Shantanu Roy
7 Nov 2025 11:33 PM IST
बिलासपुर हाईकोर्ट ने सरकारी विभागों की सुस्त कार्यप्रणाली पर जताई कड़ी नाराजगी
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Bilaspur. बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक बार फिर सरकारी विभागों की सुस्त कार्यप्रणाली और लालफीताशाही पर कड़ी टिप्पणी की है। महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से सेवानिवृत्त महिला कर्मचारी के खिलाफ दायर अपील को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि सरकारी विभागों में ईमानदारी और प्रतिबद्धता के साथ काम करना अनिवार्य है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने कहा कि विभागों में फाइलें महीनों और वर्षों तक लंबित रहती हैं, जो प्रशासनिक लापरवाही और देरी का परिणाम है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकारी विभागों के लिए सामान्य औपचारिकताएं देरी का ठोस कारण नहीं बन सकती।

दरअसल, इस मामले में विभाग ने हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के आदेश के 107 दिन बाद अपील दायर की थी। देरी के कारण के रूप में विभाग ने फाइल प्रक्रिया, आदेश जारी होने में विलंब और अन्य औपचारिकताओं को बताया। राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता ने तर्क दिया कि सरकार एक विशाल संगठन है, जिसमें विभागीय प्रक्रियाओं और औपचारिकताओं के कारण विलंब होना स्वाभाविक है। इस पर डिवीजन बेंच ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि साधारण स्पष्टीकरण अब स्वीकार नहीं किया जाएगा। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि सभी सरकारी निकायों और संस्थाओं को यह समझना होगा कि उनके कर्तव्यों का पालन पूरी लगन और प्रतिबद्धता से किया जाना चाहिए। देरी की माफी कोई अधिकार नहीं, बल्कि अपवाद है और इसका उपयोग सरकारी विभागों को ढाल के रूप में नहीं करना चाहिए।

हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून सभी के लिए समान है। इसे किसी विशेष व्यक्ति या विभाग के लाभ के लिए तोड़ा-मरोड़ा नहीं जा सकता। कोर्ट की सख्त टिप्पणी ने एक बार फिर सरकारी विभागों की कार्यसंस्कृति पर सवाल खड़े कर दिए हैं और प्रशासनिक सुधार की आवश्यकता को रेखांकित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी टिप्पणियां सरकारी विभागों के लिए चेतावनी के रूप में हैं और उन्हें अपनी कार्यप्रणाली सुधारने, फाइलों की लंबित प्रक्रिया को कम करने और नागरिकों के प्रति जवाबदेह बनने की प्रेरणा देती हैं। बिलासपुर हाईकोर्ट का यह निर्णय सरकारी तंत्र में पारदर्शिता, समयबद्ध निर्णय और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
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